• क्राइम ब्रांच इंदौर की साइबर फ्रॉड की शिकायतों के विरुद्ध प्रभावी कार्यवाही….

 

  • इन शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्यवाही करते हुए क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस की फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन टीमों ने कुल 400 से अधिक शिकायतों में 5,90,04,685/- (पांच करोड़ नब्बे लाख चार हजार छह सौ पचासी रुपये) की राशि सकुशल आवेदकों को वापस कराई है।

 

  • इसके अतिरिक्त, 200 से अधिक अन्य शिकायतों में लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये की राशि हेतु माननीय न्यायालय से प्राप्त कोर्ट ऑर्डर संबंधित बैंकों को ई-मेल (Mail) किए जा चुके हैं, शीघ्र ही आवेदकों को उक्त राशि उनके बैंक खातों में प्राप्त होगी।

 

  • क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा 10 हजार से अधिक बैंक खातों को फ्रीज / लीन (Lien) कराया गया है। साथ ही, ऑनलाइन फ्रॉड में उपयोग किए जा रहे 80 से अधिक मोबाइल नंबरों तथा 15 से अधिक मोबाइलों के IMEI को भी ब्लॉक कराया गया है।

 

  • 250 से अधिक हैक किए गए सोशल मीडिया (Facebook, Instagram) अकाउंट्स को रिकवर कराया गया है, और 350 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट जिन्हें आवेदकों के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर बनाया गया था, ब्लॉक भी कराए गए हैं।

 

रिफंड का मासिक विवरण (वर्ष 2026):

जनवरी: 36,46,049/-

फरवरी: 91,95,726/-

मार्च: 59,05,830/-

अप्रैल: 49,29,971/-

मई: 47,31,255/-

जून: 40,88,096/-

जुलाई: 1,50,20,425/-

अगस्त: 1,14,87,333/-

कुल योग = 5,90,04,685/-

क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा प्राप्त साइबर फ्रॉड शिकायतों में मुख्य रूप से निम्न तरीकों की शिकायतें दर्ज की गई हैं:

✓ मैलिशियस APK / ऐप फ्रॉड: सोशल मीडिया (Facebook, Instagram) पर विज्ञापनों के जरिए फर्जी ऐप डाउनलोड करवाकर, एक्सेसिबिलिटी परमिशन के दुरुपयोग से फोन का पूरा एक्सेस लेकर बैंक खाता खाली करना।

✓ इन्वेस्टमेंट व टास्क फ्रॉड: ऑनलाइन ट्रेडिंग, गेमिंग, और वर्क फ्रॉम होम (यूट्यूब वीडियो लाइक/सब्सक्राइब करने) के नाम पर टेलीग्राम या व्हाट्सएप के जरिए ठगी।

✓ डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): विदेश भेजे गए पार्सल में ड्रग्स या गैरकानूनी सामान होने का डर दिखाकर फर्जी पुलिस, कस्टम या CBI अधिकारी बनकर स्काइप/वीडियो कॉल के माध्यम से ठगी।

✓ AI डीपफेक व वॉयस क्लोनिंग: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर परिचित या रिश्तेदार की आवाज/चेहरा बनाकर आपातकाल (एक्सीडेंट, अस्पताल) का हवाला देकर पैसे ऐंठना।

✓ फर्जी लोन ऐप्स (Loan Apps): बिना कागजी कार्रवाई के तुरंत लोन देकर मनमाना ब्याज वसूलना और फोन का एक्सेस लेकर फोटो मॉर्फ (Morph) करके ब्लैकमेल करना।

✓ बैंकिंग फ्रॉड: बैंक अधिकारी बनकर KYC अपडेट, पैन कार्ड लिंक करने, रिवॉर्ड प्वाइंट रिडीम करने या क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर धोखाधड़ी।

✓ बिजली बिल फ्रॉड: बिजली बिल अपडेट न होने पर रात में कनेक्शन काटने का फर्जी मैसेज (SMS) भेजकर रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाकर ठगी।

✓ इम्पर्सोनेशन (पहचान चुराना): सोशल मीडिया पर परिचित बनकर भावनात्मक रूप से आवेदकों से ऑनलाइन ठगी।

✓ साइबर जागरूकता कार्यक्रमों के तहत लगातार आमजन को साइबर अपराध से बचाव के तरीके बताकर जागरूक किया जा रहा है।

अपील:

आमजन से आग्रह है कि ऑनलाइन माध्यमों से होने वाली किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचने एवं जागरूकता के लिए इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के Safe Clicks-AI Agentic Solutions (Chatbot) का उपयोग जरूर करें। इसके लिए वेबसाइट https://safeclicks.in पर जा सकते हैं अथवा मोबाइल नंबर 7049108197 पर संपर्क कर सकते हैं।

यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस की साइबर हेल्पलाइन नंबर 704912-4445 या 1930 / NCRP पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कराएं।

क्राइम ब्रांच, इंदौर

पुलिस कमिश्नरेट “आपकी सुरक्षा – हमारा संकल्प

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