- महिलाओं व बालिकाओं को डिजिटल प्लेटफार्म पर सुरक्षा, साइबर अपराधों से बचाव, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग एवं विभिन्न कानूनी प्रावधानों व हेल्पलाइन आदि के संबंध में किया जागरूक।
इंदौर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा महिला अपराधों की रोकथाम तथा उनकी सुरक्षा व उनमें इसके प्रति जनजागृति हेतु पुलिस कमिश्नर इंदौर श्री संतोष कुमार सिंह के दिशा निर्देशन में नित नए प्रयास किये जा रहे है। इसी अनुक्रम में महिलाओं एवं बालिकाओं को ऑनलाइन/सोशल मीडिया पर सुरक्षित रहने तथा साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आज दिनांक 08 मई 2026 को “Stay Safe Online -Be Aware Be Secure for women and girls” विषय पर एक दिवसीय विशेष सेमिनार आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त नगरीय इंदौर श्री संतोष कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति में, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम एवं मुख्यालय) श्री आर.के. सिंह, पुलिस उपायुक्त (क्राइम/यातायात) श्री राजेश त्रिपाठी, पुलिस उपायुक्त ज़ोन-02 श्री अमन सिंह राठौड़, पुलिस उपायुक्त ज़ोन-04 श्री सुनील मेहता, अति. पुलिस उपायुक्त ज़ोन-02 श्री अमरेन्द्र सिंह, अति. पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) श्रीमती सीमा अलावा व अन्य पुलिस अधिकारीगण एवं रेनैसां यूनिवर्सिटी इंदौर के डायरेक्टर डॉ. दिव्यादित्य कोठारी, स्कूल ऑफ आर्किटेक्ट आईपीएस एकेडमी की प्राचार्य श्रीमती मनीता सक्सेना सहित उक्त कॉलेज के स्टूडेंट्स, सामाजिक संस्था आस के सदस्यगण व उर्जा डेस्क के प्रभारी व महिला पुलिसकर्मी शामिल हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री आर.के. सिंह द्वारा सभी के स्वागत उद्बोधन के साथ किया गया, उन्होनें कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए डिजिटल डिसिप्लिन और सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग पर प्रकाश डाला।
उक्त कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से महिलाओं और बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सुरक्षित डिजिटल व्यवहार के प्रति समाज को संवेदनशील बनाना था। वर्तमान डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने पूरी दुनिया को एक छोटे दायरे में समेट दिया है। इंस्टाग्राम, स्नैपचौट, फेसबुक, ऑनलाइन चौटिंग ऐप्स और वर्चुअल फ्रेंडशिप ने समाज, परिवार और विशेष रूप से महिलाओं एवं बच्चियों के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। इन माध्यमों ने जहां संवाद के नए अवसर दिए हैं, वहीं मानसिक दबाव, असुरक्षा, भ्रम और भावनात्मक शोषण जैसी समस्याएँ भी बढ़ाई हैं।
कार्यशाला में बताया गया कि सोशल मीडिया पर कई बार बच्चे और महिलाएँ ऐसी ऑनलाइन फ्रेन्डशिप में उलझ जाते हैं जहाँ लोग अपनी वास्तविक पहचान छुपाकर भावनात्मक शोषण करते हैं। निजी फोटो और वीडियो माँगना, अपमानजनक भाषा का उपयोग करना तथा साइबर ब्लैकमेल जैसी घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। सोशल मीडिया की आभासी दुनिया के प्रभाव से आत्मविश्वास में कमी, मानसिक तनाव, अवसाद और अकेलेपन जैसी समस्याएँ भ उत्पन्न हो रही हैं।
सेमिनार में यह संदेश प्रमुखता से दिया गया कि इन समस्याओं का सबसे बड़ा समाधान केवल कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि जागरूकता, पारिवारिक संवाद और डिजिटल अनुशासन है। बच्चों को केवल मोबाइल चलाना नहीं, बल्कि डिजिटल डिसिप्लिन में रहना भी सिखाना आवश्यक है। हर ऑनलाइन मित्र विश्वसनीय नहीं होता, निजी जानकारियाँ साझा नहीं करनी चाहिए और सोशल मीडिया की आभासी चमक से सावधान रहना चाहिए। वास्तविक जीवन के रिश्तों और आत्मसम्मान का महत्व समझाना आज की आवश्यकता है।
पुलिस कमिश्नर इंदौर श्री संतोष कुमार सिंह द्वारा महिलाओं एवं बालिकाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सजग एवं सुरक्षित रहने का संदेश देते हुए, साइबर अपराधों से बचाव हेतु जागरूकता को अत्यंत आवश्यक बताया गया। साथ ही उन्होंने बच्चों व महिलाओं को इस डिजिटल युग में आत्मनियंत्रण, सावधानी और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की सीख दी।
उक्त सेमिनार में आए अतिथि वक्ताओं में डॉ. दिव्यादित्य कोठारी ने अत्यंत सरल शब्दों में बच्चों को सोशल मीडिया उपयोग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, नए साइबर कानूनों के प्रावधानों, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा मानसिक रूप से सशक्त रहने के तरीकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि सबसे पहली प्राथमिकता साइबर अपराध का शिकार होने से स्वयं को बचाना होना चाहिए।
वहीं डॉ. मनीता सक्सेना ने साइबर सिक्योरिटी से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कई मोबाइल एप्लिकेशन उपयोगकर्ताओं का निजी डेटा एकत्र कर लेते हैं। उन्होंने बच्चियों और महिलाओं को संदिग्ध ऐप्स, ऑनलाइन डेटिंग प्लेटफॉर्म्स तथा डेटा चोरी से जुड़े खतरों के प्रति सावधान रहने की सलाह दी।
वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती रचना जोरी ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार, अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स, सुरक्षित कंटेंट पोस्टिंग और सही प्रोफाइल्स को फॉलो करने जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में पैनल डिस्कशन आयोजित किया गया, जिसमें एसीपी क्राइम श्रीमती नीलम कनोजे, एसीपी हीरानगर श्रीमती रूबिना मिजवानी, एसीपी गांधीनगर श्रीमती निधि सक्सेना, थाना प्रभारी महिला थाना श्रीमती श्रद्धा यादव आदि के द्वारा महिलाओं की गरिमा, सहमति (ब्वदेमदज), पीड़ित हितैषी कार्यवाही, गोपनीयता एवं वर्तमान साइबर अपराधों के परिश्य पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त मुख्यालय डॉ. सीमा आलावा द्वारा किया गया।
सेमिनार में उपस्थित महिलाओं, छात्राओं एवं प्रतिभागियों को साइबर अपराधों से बचाव, सोशल मीडिया पर सावधानी, फेक प्रोफाइल, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, डिजिटल फ्रॉड एवं साइबर हेल्पलाइन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान की गईं।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती सीमा अलावा द्वारा किया गया, जिनके द्वारा सोशल मीडिया पर तेजी से बदलते ट्रेंड्स और उनके प्रभावों के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की गई।
इंदौर पुलिस द्वारा सभी से अपील की गई कि किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि अथवा साइबर अपराध की सूचना तत्काल पुलिस एवं साइबर हेल्पलाइन पर दें तथा जागरूक एवं सतर्क रहकर स्वयं एवं समाज को सुरक्षित बनाएं।





