“मानव तस्करी के बदलते रुझान: कानून प्रवर्तन की चुनौतियाँ एवं प्रतिक्रिया” विषय सहित इसके विभिन्न  स्वरूपों पर भी हुई परिचर्चा।

 

मानव तस्करी पर अंकुश लगाने हेतु सभी ने समन्वित प्रयास कर, कार्य करने का लिया संकल्प।

 

इंदौर – दिनांक 01अप्रेल 2026- वर्तमान परिदृश्य में मानव दुर्व्यापार जैसे संवेदनशील अपराध की रोकथाम हेतु पुलिस मुख्यालय भोपाल के निर्देशन मे  मानव तस्करी के बदलते स्वरूप, उससे जुड़ी चुनौतियों एवं प्रभावी रोकथाम की रणनीतियों पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण सेमीनार का आयोजन आज दिनांक 01.04.26 को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में किया गया। इंटरनेशनल जस्टिस मिशन (IJM) इंडिया के सहयोग से इंदौर पुलिस कमिश्नरेट के तत्वाधान में आयोजित उक्त सेमिनार में “Various Changing Trends of Human Trafficking (Law Enforcement Challenge and Response)” विषय पर  पुलिस, प्रशासन, शिक्षाविदों एवं सामाजिक संगठनों ने सक्रिय भागीदारी कर विस्तृत परिचर्चा की गई।

 

      उक्त कार्यशाला में डॉ. पी. एम. नायर (सेवानिवृत्त डीजीपी NDRF) के मुख्य आतिथ्य व पुलिस आयुक्त नगरीय इंदौर श्री संतोष कुमार सिंह की विशेष उपस्थिति में प्रोफेसर श्रीमती आशा शुक्ला (पूर्व कुलपति और एपीपीएचएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर), उप पुलिस महानिरीक्षक (महिला सुरक्षा शाखा) पुलिस मुख्यालय भोपाल डॉ. किरणलता केरकेट्टा, अति. पुलिस आयुक्त (अपराध/मुख्यालय) नगरीय इंदौर श्री आर.के. सिंह, मदद फाउंडेशन एनजीओ के फाउंडर श्री राजेशमणि त्रिपाठी सहित नगरीय इंदौर के सभी पुलिस उपयुक्तगण, सभी अति. पुलिस उपयुक्तगण, महिला एवं बाल विकास के पदाधिकारीगण, सामाजिक न्याय विभाग, महिला सुरक्षा शाखा के पुलिस अधिकारीगण एवं शहर के थानो के महिला डेस्क प्रभारी, बाल कल्याण अधिकारीगण सहित अन्य पुलिस अधिकारी/कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

 

सेमीनार का स्वागत सम्बोधन एडिशनल कमिश्नर श्री आर.के. सिंह द्वारा दिया गया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मानव तस्करी के विरुद्ध संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त डीजीपी डॉ. पी.एम. नायर ने मानव तस्करी की जांच, रोकथाम के सर्वोत्तम तरीकों एवं रणनीतियों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने आधुनिक तकनीकों के उपयोग, अंतरराज्यीय समन्वय तथा पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रभावी कानून प्रवर्तन की आधारशिला बताया।

 

इस अवसर पर अपने विचार रखते हुए पुलिस कमिश्नर श्री संतोष कुमार सिंह ने कहा कि मानव तस्करी के मामलों में त्वरित कार्रवाई, तकनीकी दक्षता और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस अपराध को रोकने के लिए पुलिस के साथ-साथ समाज की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, इसलिये हमें अपराधों पर कानूनी प्रावधानों के तहत कार्यवाही के साथ-साथ इसके संबंध में समाज में जन-जागरूकता लाने के भी प्रयास निरंतर रूप से करना चाहिये। और इंदौर पुलिस इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है, जिसके तहत सृजन व मोहल्ला मीटिंग जैसे कई कार्यक्रम संचालित कर जनजागृति के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

प्रो. श्रीमती आशा शुक्ला ने “मानव तस्करी का परिचय: वैश्विक और भारतीय परिदृश्य” विषय पर अपने विचार रखते हुए इस अपराध के व्यापक आयाम, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तथा भारत में इसके सामाजिक-आर्थिक कारणों का विश्लेषण प्रस्तुत किया।

 

मदद एनजीओ के श्री राजेशमणि त्रिपाठी ने मानव तस्करी की अवधारणा, इसके कारण, जोखिम और पहचान के तरीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पाठ्यक्रम में जागरूकता के समावेश, गैर-सरकारी संगठनों की भूमिका, बचाव एवं पुनर्वास प्रक्रियाओं में आने वाली चुनौतियों एवं कमियों पर भी विस्तार से चर्चा की।

 

डीआईजी डॉ. किरण केरकेट्टा ने मानव तस्करी के पीड़ितों पर पड़ने वाले मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक प्रभावों को रेखांकित किया। उन्होंने बचाव, पुनर्वास और पुनर्एकीकरण की प्रक्रियाओं में जमीनी स्तर की वास्तविकताओं एवं गैर-सरकारी संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका को विस्तार से समझाया।

 

उक्त कार्यशाला के दौरान मानव तस्करी की रोकथाम, जागरूकता, तकनीकी सशक्तिकरण तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।

अंत में कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ किया गया कि मानव तस्करी के विरुद्ध एक मजबूत, संवेदनशील और समन्वित तंत्र विकसित कर समाज को इस अपराध से मुक्त करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

 

कार्यक्रम का सफल संचालन अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) इंदौर श्रीमती सीमा अलावा द्वारा किया गया एवं अंत में सभी का आभार सहायक पुलिस आयुक्त हीरा नगर श्रीमती रुबीना मिजवानी द्वारा किया गया।

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